“परम्पराओं से सत्य की ओर, पुस्तक उन लोगों के लिए है जो भारत में सुसमाचार–प्रचार व मिशन में सम्मिलित हैं। यदि आप का एक हिंदू या कैथोलिक मित्र है, यह उनके लिए एक आदर्श उपहार है। लेखक के रुपान्तरण की यह उत्तेजक कहानी है, गरीबी से हस्तरेखा—शास्त्र, कर्मकाण्ड से नास्तिकता, परम्पराओं से सत्य की ओर। यह पुस्तक, प्रचलित हिन्दूवाद और रोमन कैथोलिकवाद, दोनों की प्रमुख प्रथाओं पर एक अनुसंधानात्मक अध्ययन भी है।”
—– इंडिया फोकस, बंगलुरू
“……. सच्ची शांति के लिए लेखक की खोज का यह एक हृदयस्पर्शी वृतान्त है जिसका फैलाव हिन्दूवाद से कैथोलिकवाद तक और अंततः नास्तिकता तक है, जब तक कि परमेश्वर के प्रेम ने उसे जकड़ न लिया।”
—– स्ट्यूअर्ड न्यूज़, चेन्नई
यह नडेसन के रुपान्तरण की कहानी देती है और यह कि कैसे उन्होंने ‘यीशु मसीह’ के सुसमाचार की यथार्थता का स्पष्ट अनुभव किया.…। लेखक ने इतिहास तथा ‘पवित्रशास्त्र’ दोनों में पर्याप्त शोध किया है, कि उनके बयानों को प्रमाणित करें। नडेसन, निर्भ्रान्त ‘पवित्रशास्त्र’ के प्रकाश में, विभिन्न विरोधाभासी धर्मशिक्षाओं तथा धर्मसिद्धांतों के उद्ग़म व विश्वसनीयता के साथ बरताव करते हैं, जिन ने सुसमाचार की शुद्धता और सार्थकता को जोखिम में डाला है। मसीही साहित्य में यह एक अच्छा योगदान है।
—– लाइट ऑफ लाइफ, मुंबई




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